Tuesday, November 10, 2009

निरंकुश राज - जन्तु जनता

बंगलूरू १० नवम्बर ।
मैं इन्तेजार कर रहा था की राज ठाकरे के मुद्दे को लेकर क्या सोंच रखते हैं हमारे राज नेता... हमने देखा की सारे नेता गन जनता को जन्तु समझने से बाज नही आ रहे। राज ठाकरे तो अपनी पहचान के लिए लालायीत है और वो सस्ती लोकप्रियता बटोरने के लिए भोंडे भाषण कला और घिनौनी और गन्दी राजनीति या आप यूँ कहें की ठाकरेनिति को लागू करने में लगा है... कहाँ गए हैं इस देश की मान सम्मान की रक्षा का दंभ भरने वाले हमारे राज नेता ? लोकतंत्र शर्मशार हो गया... ये कह देने मात्र से राज सरीखे देश्द्रोहिओं को कोई फर्क पड़ जाएगा.... ऐसा नही लगता... जो दल इस देश के संविधान में आस्था नही रखता उस दल के चार सिपहिओं को ही क्यों पूरे दल को विधानसभा या लोकसभा से निष्काषित क्यों न कर दिया जाए ? दल के मुखिया को देशद्रोह के मामले में लेकर क्यों न कारागार में ठूंस दिया जाए? किस बात का इन्तेजार है भारत में विधि द्वारा स्थापित सरकार को ? इश्वर की शपथ लेकर जनता के हितों की रक्षा और भारत के अखंडता और सम्प्रबूता की रक्षा का प्रण लेने वालों को ? अगर इनलोगों नें चूडियाँ पहन कर राज ठाकरे के दरबार में नर्तक और नार्ताकिओं की भांति नाचने गाने के लिए ही प्रतिबद्धता स्वीकार कर ली है... और कोई भी मजबूरी अगर इन्हे देश्द्रोहिओं को वाजीब सज़ा देने से रोक रही है तो ... बेहतर ये है की जनता का मुख देख कर... उनके भावनाओ का ख्याल करते हुए संवैधानिक भाषा में जवाब देने के बजाये... मजबूत कदम उठायें ताकि देश्द्रोहिओं को पनाह के लिए तरसना पड़ जाए.... आज नही तो कल इस देश की जनता सबक सिखाएगी उस हर राष्ट्र सेवकों को जो राजनैतिक मज्बूरिओं का हवाला देकर जनता को जन्तु समझने की गलती कर बैठते हैं...
राज ठाकरे.... को संहारने के लिए शरद यादव, नीतिश कुमार, मुलायम सिंह, लालू यादव, राम विलास पासवान और ऐसे ही कई राजनैतिक हस्तियों की जरूरत नही... बल्कि इस देश के एक सच्चे नौजवान देशभक्त की जरूरत है.... जो राजनीति से ऊपर उठ कर देशभक्ति की बात सोंच सके...
ठाकरे निति कहती है की मराठा मानुष के नाम पर देश को ताख पर रख दो.... और राष्ट्र के संविधान को चूल्हे में लगा दो... और इस ठाकरे निति से हमारे देश के स्वाभिमान अखंडता एकता और संप्रभुता को खतरा हो तो भी हाथ पर हाथ रख कर बैठना कोई राजनैतिक मजबूरी हो सकती होगी किसी सरकार , दल अथवा किसी राजनेता की... लेकिन जिस जनता को जन्तु मान के लोग बैठे हैं... इस जनता में जरा जागृति का संचार हनी भर की देर है.... क्रिकेट प्रेम में देशभक्ति प्रर्दशित करने वाली जनता को अब ये भी समझ में आना चाहिए की देश प्रेम केवल क्रिकेट ... नाच गानों के प्रतियोगिओं के नाम पर संक्षिप्त संदेश भेज कर या पाकिस्तान विरोधी नारे लगा देने भर से कोई रस्व्ह्त्र भक्त नही हो जाता.... राष्ट्र की गरिमा को धूमिल करने वालों को ख़तम करना भी राष्ट्र भक्ति है... अलगाव्वादिओं को अगर सरकार नही रोक सकती तो फिर उनका फैसला जनता करेगी.... और जनता के द्वारा चुनी गई सरकार अपनी मज्बूरिओं को गिनाती रहेगी.... लेकिन मुझे लगता है... की जन्तु बन चुकी जनता ही काफ़ी है इस राज के खात्मे के लिए... लोग तमाशा देखते रह जायेंगे और "गणपति" अपना फ़ैसला कर देंगे....
शर्म करने की जरूरत राज ठाकरे को नही... क्योंकि ये तो राष्ट्र द्रोही है ही.... इनकी शब्दकोष में स्वभक्ति है... स्वकल्याण एवं राजनैतिक दूर्भिक्ष्ता से पलायन कर राजनैतिक बहार को पाने की उत्कट लालसा है... वो भी जैसे तैसे... चाहे राष्ट्र की कीमत पर हो या राष्ट्र भाषा की कीमत पर...
बल्कि शर्म तो भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा की कसम खा कर राजनैतिक श्रेष्ठ पदों पर आसीन हुए लोग और विधि के नाम पर स्थापित भारत के संविधान में अटूट आस्था के नाम पर बनाये गए दलों और परशन के प्रमुखों और राज्य व राष्ट्र सेवा में संलग्न अधिकारिओं और पुलिश बल और इन्सबसे ऊपर न्यायपालिका को होनी चाहिए.... ये तमाशा देख कर संवैधानिक भाषा में टिपण्णी करके जनता को अपना मत और सोंच प्रर्दशित करने का समय नही ... अपितु देश्द्रोहिओं की शल्य चिकित्सा के मानदंड स्थापित करने का वक्त है...
कोई नही करेगा तो "गणपति" कर देंगे... जो जनता के सच्चे प्रतिनिधि हैं आधा जन्तु - आधी जनता।
देखना है की ठाकरे महाराष्ट्र से गणपति को कैसे निकल बहार करते हैं... या ये गणपति ठाकरे को राजनीती से निकल बहार करते हैं....
जो व्यक्ति... दल अथवा संगठन देशद्रोह को समर्थन दे रहा हो... उसको अगर आधिकारिक रूप से मुद्रा के व्यवहार पर रोक लगा दिया जाए तो फिर देखते हैं.... मराठा मानुष के नाम पर देश द्रोह चलाने वालों में कितनी सलाहियत है.... ये केवल मराठा मानुष के नाम पर देश्द्रोहिओं पर ही नही बल्कि उस हर संगठन से ताल्लुक रखने वाली चीज है जो इस देश में अलगाववाद को बढावा देते हैं....
"सत्यम तवैव विज्ञातु "
इस मंत्र के आधार पर अगर खोज की जायेगी तो पता लगेगा की मराठा प्रेम राज ठाकरे की निजी सोंच है... जबकि देश प्रेम मराठों की आम सोंच है... अतः दोषी मराठी नही... ठाकरे हैं...
अनर्गल प्रलाप का वक्त नही... निरंकुशता व राष्त्रद्रोहिओं को काबू करने की कवायद की आवश्यकता है... अपराधी समूह नही व्यक्ति होता है ... अपराधिओं का संगठन हो सकता है ... राज्य या देश नही ।
जय हिंद जय जनते ॥
आर.के.जुगनू
नेता
जनता दल (यूनाइटेड)